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सामान्य कार्यालय प्रबन्धन के पर्यवेक्षण एवं उत्तरदायित्व के माध्यम

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सामान्य कार्यालय प्रबन्धन के पर्यवेक्षण एवं उत्तरदायित्व के माध्यम:-

विभागाध्यक्ष एवं कार्यालयाध्यक्ष के कर्तव्र्यों के निर्वहन हेतु स्पष्ट कार्य बंटवारा किया गया है।

1. कार्यालय में नियुक्त वर्ग घ के कर्मचारी, कार्यालय खुलने के नियत समय से आधा घण्टे पूर्व आकर कार्यालय खोलना, मेज, कुर्सी, अलमारी, कम्प्यूटर कक्ष आदि की सफाई करना तथा यदि कोई आपत्तिजनक सामग्री या विशेष घटना हो तब तत्काल सम्बन्धी अधिकारी को सूचित करना/कार्यालय में पीने के पानी की व्यवस्था करना, कप प्लेटों को साफ करना तथा सुरक्षित रखना। समय-समय पर बैठक आदि के अवसर पर चाय/जलपान को व्यवस्थित ढंग से वितरित करना, कार्यकाल में संबन्धित अधिकारियों के आदेश पर गन्तव्य स्थल पर डाक या अन्य शासकीय सामग्री, पत्रावलियां समय-समय से प्राप्त कराकर रसीद प्राप्त करना।

2. निदेशालय में डाक प्राप्त करने हेतु अधिकृत कर्मचारी का दायित्व है कि डाक प्राप्त कर उसे निदेशक या उनकी अनुपस्थिति में उप निदेशक या उसके अनुपस्थिति में सहायक निदेशक के समक्ष प्रस्तुत करने तथा उस पर दिये गये निर्देश के अनुसार कार्य करना।

3. कार्यालय में रखी जाने वाली पंजिकाएं विशेषकर भण्डार पंजिका, सम्पति पंजिका, स्टेशनरी पंजिका, आकास्मिक, अर्जित, चिकित्सा अवकाश पंजिका, सेवा पुस्तिका, भविष्य निधि पासबुक तथा तत्सम्बन्धी लेजर निदेशक जिसके पास कार्यालयाध्यक्ष का प्रभार है सीधा नियन्त्रण रखने का दायित्व है। निदेशक के नियन्त्रणाधीन परन्तु उनके सहायक की अभिरक्षा में अधिकारियों/कर्मचारियों की वार्षिक प्रविष्ठि फाईल में रखी जाती है। निदेशक के निर्देशों को यथावत सम्बन्धित अधिकारी/कर्मचारी को सूचित करें तथा सम्बन्धित अधिकारी/कर्मचारी को जब तक किसी विरोधाभास का आभास न हो उनके सहायक द्वारा दी गयी सूचना निदेशक का निर्देश/आदेश मानना चाहिए और यदि कई संशय हो तो निदेशक से सीधे वार्ता करना चाहिए। यदि निदेशक किसी कारणवश उपलब्ध न हों तब तत्कालिक महत्व की सूचना कार्यालयाध्यक्ष को दिया जाना चाहिए।

4. अधीनस्थ कार्यालय के कर्मचारी बिना कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष की अनुमति के निजी प्रकरण में शासन स्तर से पत्राचार नहीं कर सकते तथा बिना पूर्व अनुमति के शासन के अधिकारी या विभागाध्यक्ष से मिलने हेतु यात्रा नहीं कर सकते। सेवा सम्बन्धी तथा ट्रांसफर के प्रकरण में प्रतिवेदन उचित माध्यम से प्रस्तुत करने तथा राजनैतिक दबाव डालना आचार संहिता का उल्लंघन एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारम्भ करने का आधार माना जायेगा।