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Functions and duties of the Department of Sports

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1. राज्य के खिलाडि़यों को अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर उच्च प्रदर्शन करने हेतु अवस्थापना सुविधाओं का सृजन।

राज्य के प्रत्येक जनपद में खिलाडि़यों को प्रशिक्षण प्रदान करने एवं प्रतियोगिताओं के आयोजन करने हेतु अवस्थापना सुविधाएं सृजित की जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत खेल निदेशालय, उत्तराखण्ड द्वारा प्रत्येक जनपद में स्टेडियम एवं बहुउद्देशीय क्रीड़ा हाल का निर्माण कराये जाने की योजना है, साथ ही उपलब्ध अवस्थापना सुविधाओं का उच्चीकरण एवं विस्तारीकरण का कार्य भी कराया जायेगा। उत्तराखण्ड राज्य के 13 जनपदों में से 11 जनपदो में 13 स्टेडियम निर्मित है, जनपद टिहरी गढ़वाल एवं जनपद बागेश्वर में स्टेडियम हेतु पर्याप्त भूमि उपलब्ध न होने के कारण दोनो जनपदो में स्टेडियम का निर्माण लम्बित है। इसके अतिरिक्त 09 इंडोरहाल निर्मित है तथा जनपद अगस्त्यमुनि (रूद्रप्रयाग) एवं डुण्डा (उत्तरकाशी) में 02 इंडोरहाल निर्माणाधीन है। राज्य में 02 तरणताल - काशीपुर (उधमसिंह नगर) एवं हल्द्वानी (नैनीताल) में निर्मित है। शासन की विकेन्द्रीयकरण प्रणाली के तहत जनपद स्तर पर जिला योजना के अन्तर्गत क्रीड़ा प्रतिष्ठानों का निर्माण मद से जनपद के अन्तर्गत आवश्यकतानुसार अवस्थापनाओं की सुविधाओं का सृर्जन, उच्चीकरण एवं विस्तारीकरण का कार्य किया जाता है।

2. राज्य के प्रत्येक जनपद में खिलाडि़यों हेतु विभिन्न खेलों के प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन।

राज्य के प्रत्येक जनपद में उद्ीयमान बालक/बालिकाओं को खेल प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु अनेक खेलों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित कराये जाते हैं। इन प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से लाभान्वित अनेक खिलाडि़यों ने राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय सफलताएं अर्जित की है।

3. खिलाडि़यों की खेल क्षमता के आकंलन एवं प्रतिस्र्पद्धा अनुभव हेतु प्रति- योगिताओं का आयोजन।

राज्य के प्रत्येक जनपद में विभिन्न खेलों में जनपद एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित करायी जाती हंै। इन प्रतियोगिताओं के आयोजन से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे खिलाडि़यों की खेल क्षमता का आंकलन तथा इन्हंे प्रतिस्र्पधा का अनुभव प्राप्त होता है। इन प्रतियोगिताओं के आयोजन से जनमानस में खेल के प्रति रूझान बढ़ता है तथा इसके अतिरिक्त कई राष्टीय प्रतियोगिताएं भी आयोजित कर खेल क्षमता के आकलन के साथ ही खेलों के प्रति उत्साह एवं प्रोत्साहन में वृद्धि होती है।

4. राज्य के विभिन्न जनपदों में विभागीय अवस्थापना सुविधाओं का उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण।

जनपदों में निर्मित स्टेडियम का उच्चीकरण एवं सुदृढीकरण भी आवश्यकतानुसार कराया जाता है जिससे कि अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर संशोधित नियमों एवं प्रशिक्षण प्रणाली के अनुसार अवस्थापना सुविधाएं उद्ीयमान खिलाडि़यों को प्राप्त हो सके।

5. राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाली प्रदेशीय टीम के खिलाडि़यों को स्पोटर््स किट उपलब्ध कराना।

मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली राज्य टीमों के खिलाडि़यों को स्पोटर््स किट उपलब्ध कराया जाता है। इस स्पोटर््स किट में टैªक सूट, वार्म अप सू, मोजे तथा खेल के अनुरूप अन्य स्पोटर््स किट होता है।

6. भूतपूर्व प्रसिद्ध खिलाडि़यों को वित्तीय सहायता।

इस योजना के माध्यम से भूतपूर्व प्रसिद्ध खिलाडि़यों को प्रत्येक माह आर्थिक सहायता निर्धारित मानकों के अनुसार दिये जाने का प्राविधान है। ऐसे खिलाड़ी जिन्होने खेल के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित कर, प्रसिद्वि प्राप्त की हो तथा जीविकोपार्जन में असमर्थ हो, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। राज्य स्तर के वे खिलाड़ी जिन्होंने प्रदेश की अधिकृत टीम का प्रतिनिधित्व किया हो उन्हें रू. 500.00 प्रतिमाह, राष्टीय स्तर के वे खिलाड़ी जिन्होंने राष्ट्र के अधिकृत टीम का प्रतिनिधित्व किया हो रू. 700.00 प्रतिमाह तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के वे खिलाड़ी जिन्होंने राष्ट्र की अधिकृत टीम के सदस्य होकर ओलम्पिक/कामनवैल्थ/एशियन तथा विश्वकप खेलों में राष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया हो रू. 1000.00 प्रतिमाह का मानक निर्धारित है। वर्तमान में उक्त धनराशि के मानको में संशोधन, शासन को प्रस्तावित है।

7. क्रीड़ा छात्रावास के आवासीय खिलाडि़यों का नियमित प्रशिक्षण।

आवासीय क्रीड़ा छात्रावास योजना, खेल विभाग की अत्यन्त महत्वपूर्ण, लक्ष्यमूल्क एवं परिणाम देने वाली योजना है। जिसके अन्तर्गत प्रदेश के खिलाडि़यों का जिला स्तर से प्रदेश स्तर पर चयन कर, उनको विभिन्न खेलों में स्थापित छात्रावासों में प्रवेश दिया जाता है। आवासीय छात्रावासों के बालक/बालिकाओं को विभाग द्वारा भोजन, शिक्षा, चिकित्सा, स्पोटर््स किट व खेल उपकरण आदि तथा विभिन्न स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभागिता एवं आवासीय सुविधा निःशुल्क उपलब्ध करायी जाती है। एक खिलाड़ी पर प्रतिवर्ष लगभग रू0 40 से 45 हजार का व्यय होता है जो खेल विभाग द्वारा ही वहन किया जाता है। इन आवासीय छात्रावासें के खिलाडि़यों ने अपने-अपने खेल में राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां प्राप्त कर, प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है। इन छात्रावासों पर होने वाला व्यय, राज्य सैक्टर के अन्तर्गत प्राविधानित आवासीय खिलाडि़यों पर व्यय-42-अन्य व्यय नामक मद से वहन किया जाता है। वर्तमान में देहरादून एवं हल्द्वानी आवासीय फुटबाल छात्रावास में 25-25, पिथौरागढ़ में आवासीय एथलेटिक्स छात्रावास में 20 एवं कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) में संचालित आवासीय बाक्सिंग छात्रावासों में 20 बालक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। खेलों में महिलाओं की सहभागिता के मध्यनज़र, खेल निदेशालय द्वारा, राज्य में बालिकाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित करने एवं परिणाम परिलक्षित कराने के उद्देश्य से जनपद अगस्त्यमुनि (रूद्रप्रयाग) में 01 आवासीय एथलेटिक्स छात्रावास स्थापित किया गया है, जिसमें 25 बालिकायें गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

8. विशिष्ठ खिलाडि़यों को प्रदेशीय पुरस्कार।

इस योजना के अन्तर्गत राज्य के राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय सफलता अर्जित करने वाले विशिष्ठ खिलाडि़यों को राज्य पुरस्कार से सम्मानित किये जाने के प्राविधान हेतु प्रस्ताव शासन के विचाराधीन है।

9. राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक विजेता खिलाडि़यों/प्रशिक्षकों को पुरस्कार।

इस योजना के अन्तर्गत राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य के पदक विजेता खिलाडि़यों को नकद पुरस्कार से सम्मानित किये जाने का प्राविधान है जिसके निर्धारित मानक निम्नानुसार है।

शासन के पत्र सं0 404/ टप्.प्/09-2(7)/07 दिनांक 30 सितम्बर, 2009 के अनुसार विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय खेलों में राज्य के पदक विजेता खिलाडि़यों को पुरस्कार प्रदान किये जाने हेतु निर्धारित मानकों का विवरण निम्नवत् हैः-

क्रंसं प्रतियोगिता का नाम पुरस्कार की राशि (धनराशि लाख रूपये में)
    स्वर्ण पदक रजत पदक कांस्य पदक
  ओलम्पिक खेल 75-00 50-00 25-00
 
    विश्व चैम्पियन / राष्ट्र मण्डलीय खेल / एशियन खेल
  1. सीनियर
  2. जूनियर
  3. सब. जूनियर
10-00
03-00
01-00
05-00
1-50
0-50
3-00
0-75
0-25
  ए-ितकुनवयायाई चैम्पियन-ितकुनवयाप
  1.  
    1. सीनियर
    2. जूनियर
    3. सब. जूनियर
05-00
02-00
00-50
03-00
01-00
0-25
02-00
0-50
0-15
  रा-तेुनवयट-वतकयिीय खेल / सैफ खेल 0-300 01-50 0-75
  रा-तेुनवयट-वतकयिीय चैम्पियन-ितकुनवयाप
  1.  
    1. सीनियर
    2. जूनियर
    3. सब. जूनियर
0-50
0-20
0-10
0-25
0-10
0-05
0-15
0-05
0-03
  अंतविश्वविद्यालय 0-10 0-05 0-03
  रा-तेुनवयट-वतकयिीय स्कूली प्रतियोगिता 0-20 0-10 0-05

टीम स्पर्धाओं के लिए निम्न मानक अपनायें जायेगे:-

क्रं
सं
टीम में खिलाडि़यों की संख्या व्यक्तिगत स्पधाओं में दिये जाने वाले पुरस्कार की राशि का गुण्ंाक

1

02 खिलाड़ी 1.5 गुणा

2

03 अथवा 04 खिलाड़ी 02 गुणा

3

5 से 10 खिलाड़ी 03 गुणा 

4

10 से ज्यादा खिलाड़ी 05 गुणा 

पुरस्कारों के लिए पात्रता निर्धारण हेतु निम्नांकित शर्ते होगीः-

पुरस्कार उन खिलाडि़यों को ही दिया जायेगा जो उत्तराखण्ड राज्य टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए स्थान / पदक प्राप्त किये हो।

एक खिलाड़ी को किसी एक श्रेणी में सम्मानित होने पर पुनः उसके द्वारा उच्च श्रेणी की उपलब्धियों को प्राप्त करने के लिए भी पुनः सम्मानित किया जायेगा। 

भारतीय ओलम्पिक संघ द्वारा मान्यता प्राप्त खेलों/प्रतियोगिताओं में स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ी ही पुरस्कार के पात्र होगें।

पुरस्कार प्राप्त करने वाले खिलाडि़यों को निदेशक खेल उत्तराखण्ड को इस आशय का एक अनुबंध पत्र (ठवदक) प्रस्तुत करना होगा कि नकद धनराशि प्राप्त की तिथि से 5 वर्षो तक किसी अन्य राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे।

निदेशक खेल द्वारा कलैण्डर वर्ष में एक बार निर्धारित प्रारूप पर नकद पुरस्कार प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किये जायेंगे। आवेदन पत्र के साथ सभी आवश्यक प्रमाण पत्रों को संलग्न किया जायेगा, तथा विजेता पदक/स्थान/अंलकरण की प्रतियाॅ भारतीय ओलम्पिक एसोसिएशन अथवा मान्यता प्राप्त अन्तर्राष्ट्रीय खेल परिषद् से प्रमाणित होनी चाहिए। पुरस्कार राशि हेतु प्राप्त आवेदन पत्रो का परीक्षण एक समिति के द्वारा किया जायेगा। समिति की अध्यक्षता निदेशक, ख्ेाल उत्तराखण्ड द्वारा की जायेगी तथा सदस्य रूप में सम्बन्धित खेल का मान्यता प्राप्त एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि एवं निदेशक/सहायक निदेशक खेल जो कि निदेशक ख्ेाल द्वारा नामित किये जायेगें, सदस्य होगें।

उपर्युक्त प्रतियोगिताओं के सफल खिलाडि़यों /टीमों के ऐसे प्रशिक्षकों को पुरस्कृत किया जायेगा जो टीम / खिलाड़ी के साथ नियमित रूप से 240 दिन अथवा अधिक अवधि तक प्रशिक्षण दे चुके हों, एक से अधिक प्रशिक्षक होने पर पर प्रोत्साहन राशि बराबर-बराबर बाॅट दी जायेगी। प्रशिक्षकों को प्रोत्साहित करने हेतु पुरस्कार की राशि निम्नवत् होगीः-

क्रं
सं
प्रतियोगिता का नाम पुरस्कार की राशि (लाख रूपयेे में)
स्वर्ण पदक  रजत पदक कांस्य
पदक
1. ओलम्पिक खेल  2-0 1-0 0-50
2. एफ्रोएशियन खेल 1-0 0-50 0-25
3. राष्ट्र मण्डल खेल  0-50 0-25 0-15
4. अन्तर्राष्ट्रीय चैम्पियनशिप / राष्ट्रीय खेल/ राष्ट्रीय चैम्पियनशिप 0-30 0-15 0-10

निदेशक ख्ेाल द्वारा खिलाडि़यों के प्रायोजन के सम्बन्ध में प्राथमिकता के आधार पर प्रयास किया जायेगा, तथा पुरस्कार की धनराशि में प्रायोजक से यथासम्भव अधिकतम अंशदान प्राप्त करने का प्रयास किया जायेगा।

10. प्रदेशीय क्रीड़ा संघों, क्लबों एवं अन्य क्रीड़ा संघों आदि को प्रतियोगिताओें के आयोजन करने एवं खेल उपस्कर क्रय हेतु अनावर्तक अनुदान।

इस योजना के अन्तर्गत प्रदेशीय क्रीड़ा संघों, क्लबों एवं अन्य संघों को प्रतियोगिताएं आयोजित करने तथा खेल उपस्कर क्रय करने हेतु अनुदान दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। प्रतियोगिताएं विभाग की महत्वपूर्ण योजना है। प्रतियोगिताओं के माध्यम से राज्य के खिलाडि़यों को प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त होता है साथ ही गुणदोष के आधार पर खेल प्रदर्शन में आगामी उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने से पूर्व सुधार का अवसर प्राप्त होता है। प्रतियोगिताओं के माध्यम से जनमानस में खेलों के प्रति रूझान बढ़ता है। खेल संघों आदि को आर्थिक स्रोतो के अभाव में प्रतियोगिताओं के आयोजन करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। अतः इस योजना के माध्यम से प्रतियोगिताओं के आयोजन एवं खेल उपस्कर क्रय हेतु अनुदान दिये जाने का प्राविधान किया गया है जिससे कि राज्य के उद्ीयमान खिलाड़ी इस योजना का लाभ उठा सके।

11. प्रदेशीय क्रीड़ा संघों को आर्थिक सहायता।

प्रदेशीय क्रीड़ा संघ, विभिन्न खेलों की प्रदेशीय टीमों का चयन कर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने हेतु भेजते है। इन प्रदेशीय संघों की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण चयनित खिलाडि़यों से ही आने-जाने का किराया एवं भोजन भत्ता पर व्यय होने वाली धनराशि की मांग की जाती है, जिसके फलस्वरूप चयनित खिलाडि़यों पर आर्थिक बोझ पडता है। कभी-कभी अच्छे खिलाड़ी धनाभाव के कारण राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले पाते है। अतः खिलाडि़यों एवं संघों को आर्थिक बोझ से मुक्ति दिलाने के उद्देष्य से राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रदेशीय टीम के खिलाडि़यों पर हुये यात्रा व्यय तथा यात्रा अवधि का भोजन भत्ता एवं अनुसांगिक व्यय की प्रतिपूर्ति प्रदेशीय क्रीड़ा संघों को उनके द्वारा मांग किये जाने पर की जाती है।

12. अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रदेश के भाग लेने वाले खिलाडि़यों हेतु अनुदान।

इस योजना के अन्तर्गत राज्य के ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ी जो भारत का प्रतिनिधित्व कर अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक अर्जित करके राष्ट्र एवं राज्य का नाम गौरवान्वित करते है। इन पदक विजेता खिलाडि़यों को नकद पुरस्कार दे कर सम्मानित किये जाने की योजना संचालित की गयी है। इस मद से अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले ऐसे खिलाडि़यों को भी आर्थिक अनुदान दिये जाने की व्यवस्था की गयी है जिन्हें भारत सरकार अथवा राष्ट्रीय खेल संघ द्वारा यात्रा आदि पर व्यय होने वाली धनराशि उपलब्ध नहीं करायी जाती।

13. स्पोटर््स कालेज को अनुदान।

देहरादून में संचालित महाराणा प्रताप स्पोटर््स कालेज में फुटबाल, एथलेटिक्स, बाक्सिंग, क्रिकेट, हाकी एवं वालीबाल खेलों में बालक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इन बालकों के शिक्षण हेतु स्पोटर््स कालेज में कक्षा-6 से कक्षा-12 तक कक्षाएं भी संचालित की जाती है। इन बालकों को भोजन, प्रशिक्षण, शिक्षा, किट एवं खेल उपकरण आदि की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध करायी जाती है। स्पोटर््स कालेज को संचालित करने हेतु शासन द्वारा अनुदान दिये जाने की व्यवस्था की गयी है।

14. नेहरू पर्वतारोहण संस्थान को अनुदान।

उत्तरकाशी में स्थापित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान को पर्वतारोहण योजनाओं को संचालित करने एवं वेतन आदि के भुगतान के लिए शासन द्वारा अनुदान दिये जाने का प्राविधान है। इस सस्थांन को कुछ अनुदान भारत सरकार से भी प्राप्त होता है।

15. खेल निदेशालय द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर सहायक निदेशक/जिला खेल कार्यालयों को शासन से स्वीकृति के उपरान्त बजट आवंटित करना।

राज्य के मण्डलीय मुख्यालय एवं जनपदों में तैनात सहायक निदेशक खेल एवं जिला क्रीड़ा अधिकारियों को वेतन एवं विभागीय योजनाओं के संचालन हेतु बजट आवंटित किया जाता है।

16. विभागीय कार्यकलापों पर नियन्त्रण।

सहायक निदेशक खेल एवं जिला क्रीड़ा अधिकारी द्वारा संचालित विभागीय योजनाओं का समय समय पर निरीक्षण किया जाता है जिससे कि खिलाडि़यों के प्रोत्साहन एवं खेलों के विकास हेतु संचालित योजनाएं सुचारू रूप से संचालित हो सके।

17. कार्मिकों के अधिष्ठान से सम्बन्धित प्रकरणों का निस्तारण।

खेल विभाग मेें कार्यरत कार्मिकों का समय समय पर अधिष्ठान से सम्बन्धित प्रकरणों का निस्तारण खेल निदेशालय द्वारा किया जाता है। इन प्रकरणों में प्रोन्नति, वेतन निर्धारण, वेतन वृद्धि, वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि, अवकाशों की स्वीकृति आदि सम्मलित है।

18. शासन द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों का पालन।

खेल निदेशालय शासन एवं फील्ड में तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों के मध्य एक महत्वपूर्ण कडी है। शासन द्वारा समय समय पर जारी आदेशों/दिशा-निर्देशों के अनुपालनार्थ फील्ड में तैनात अधिकारियों को दिशा-निर्देश देता है।

19. विभागीय सूचनाओं का संकलन कर शासन को प्रेषण-खेल निदेशालय प्रतिमाह व्यय हुयी धनराशि का संकलन कर शासन को प्रेषित करता है।

इसी प्रकार योजनाओं से सम्बन्धित सूचनाएं भी संकलित कर शासन को प्रेषित की जाती है।